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रविवार, 29 दिसंबर 2024

भगवान का शुक्र

भगवान का शुक्र किया,

     तो करता ही चला गया !

मैं तो कृष्ण के प्रेम में,

     बहता ही चला गया !!

शुरू किया था,

     दो ही अक्षर लिखना !

मैं तो फ़साना ही,

     लिखता चला गया !!

ये श्वास,  

    ये खुशबू, 

           ये नज़ारे,

मैं तो खुशी में, 

    समाता ही चला गया !

कृष्ण की मुरली की,

     तान सुनकर !


मैं अपने मन को,

     भुलाता ही चला गया।

चलता चला जाऊं,

     मैं यूं ही रास्ते पर !!


कृष्ण के शुक्र में,

     करता ही चला जाऊं !

हर मोड़ पर, उनकी लीला को देखूं,

     हर कदम पर उनके नाम को जपूं !!


तेरा नाम ही,

     मेरी साधना बने !

तेरे चरण ही,

     मेरी यात्रा बने !!

शुरू किया जो,

     प्रेम का सफर !

कृष्ण, तुझमें ही,

     मैं खोता चला गया !!

शब्द खत्म हों, 

    पर प्रेम न रुके !

तेरी महिमा का गान,

     कभी न थमे !

भगवान का शुक्र किया,

     तो करता ही चला गया !

मैं तो कृष्ण के प्रेम में,

     बहता ही चला गया !!

शनिवार, 21 दिसंबर 2024

किसको जोड़ रहा है प्यारे साथ क्या ले जाएगा

किसको जोड़ रहा है प्यारे, 

     साथ क्या ले जाएगा !

हाथ खाली, जेब भी खाली, 

   सीधा ऊपर जाएगा।!

मोह-माया के पीछे, 

    भागेगा तो क्या पाएगा !

आत्मा की शुद्धि कर, 

        यही तुझे तराएगा।

रिश्ते-नाते, 

    दोस्त-प्यारे, 

सब यहीं रह जाएंगे !

तेरे संग तेरा कर्म  ही ऊपर जाएंगे।

किसका साथ, 

   कौन अनाथ !

तू अकेला आया था, 

   अकेला ही जाएगा।

हाथ खाली, जेब भी खाली, 

   सीधा ऊपर जाएगा।!

मोह के बंधन को तू  तोड़, 

   सच्चाई को गले लगा !

राम का नाम जप, 

   यही तुझे शांति दिलाएगा।!

जो भी मिला, 

    सब यहीं छोड़ जाएगा !

बस पुण्य और भक्ति का खज़ाना ही संग जाएगा।

भज ले प्यारे राम का नाम,

तेरा सहारा,  सच्चा धाम।

वही तो तेरे साथ जाएगा 

मंगलवार, 17 दिसंबर 2024

बंदरों की तरह लोग

बंदरों की तरह लोग कूदें,

      दिन भर बस भागमभाग में रूठें !

कभी फाइलों के ढेर में खोए,

      कभी मीटिंग के भंवर में डूबें !!


काम का जंगल, सपनों का भार,

     हर कोई बन बैठा बंदर लाचार !

सुबह उठें, दौड़ लगाएं,

शाम को थके, बस सो जाएं !!


कोई टीचर, कोई डॉक्टर,

      कोई इंजीनियर, कोई एक्टर !

हर काम बस एक ही धुन,

      खो गया मन का सूक्ष्म जुनून !!


फिर एक दिन आवाज़ आई,

      भीतर से कोई पुकार लगाई !

ये क्या कर रहे हो भाई , 

   रुक जाओ !!

  खुद को जानो, 

          थोड़ा मुस्कराओ !!

आत्मा की वो कोमल पुकार,

     तोड़ी जालिम भागदौड़ की दीवार !

जिनके भीतर था जोश कभी,

      अब खोजने लगे खुद का सही !!

अब समझे, ये दौड़ थी झूठी,

सच तो भीतर था, 

          ना कहीं बाहर !!

 अपने भीतर के ज्ञान को पहचान 

      और जान के साधक कहला !! #shabdras 

सोमवार, 16 दिसंबर 2024

सब जान, नर-पशु, मेरे लिए तो सब समान

 सब जान, नर-पशु, मेरे लिए तो सब समान

न कोई छोटा, न कोई बड़ा,
सबका मेरा एक ही मान।

आकार-विकार भले हों अलग,
रंग-रूप भी हों अनेक प्रकार,
इन्हीं भेदों से रचा है मैंने यह सुंदर संसार।

मेरे लिए तो सब समान,
न कोई भेद, न कोई भाव,
सब मेरे ही अंश हैं,
सब पर एक समान बरसता मेरा प्यार।

मुझ तक पहुँचना है यदि आसान,
तो त्याग दो मन का भ्रमित जहान।
श्रद्धा, प्रेम और समर्पण से आओ,
मेरी शरण में संपूर्ण हृदय से समा जाओ।

मैं वहीं हूँ जहाँ विश्वास है,
जहाँ प्रेम का अटल प्रकाश है।
जो खोजेगा सच्चे मन से मुझे,
वही पाएगा मेरा आशीष और हृदय में निवास है।

शनिवार, 11 सितंबर 2021

कृष्णा का नाम जपते चले

कृष्णा का नाम जपते चलो,
    सुबह-शाम सिमरन करते चलो।
कृष्णा का नाम जपते चलो,
    हर सांस में उनका ध्यान करते चलो।

गलत राह से हट जाए मन,
    पाप से दूर, हो सच्चा जीवन।
जपो बस नाम, वही सच्चा जाप,
    कृष्णा के चरणों में हो हर परिताप।

हो जाऊं विलीन, ऐसा करो प्यार,
    जपते-जपते दिखे सारा संसार।
सुबह-शाम सिमरन करते चलो,
    कृष्णा का नाम जपते चलो।

ध्यान न बंटे, बस उनका जाप हो,
    प्यार मिले उनकी झोली का अपार हो।
दिन हो या रात, यही एक स्वप्न,
    कृष्णा के नाम में ही सारा अपनापन।

दे दो मुझे अपना अमृत-नाम,
    उद्धार करो, यही है अरमान।
कृष्णा, तुम चलाते हो ये संसार,
    साथ ही ब्रह्मांड का भी करते उद्धार।

दुखों का सागर भी सुखमय हुआ,
    जब तुम्हारे नाम ने मन शुद्ध किया।
आत्मा मिली तुझसे पावन स्वरूप,
    कृष्णा, तुम हो मेरे जीवन का रूप।

कृष्णा का नाम जपते चलो,
    सुबह-शाम सिमरन करते चलो।
हर कदम तुम्हारे नाम का सहारा,
    कृष्णा, तुम ही हो जीवन हमारा। #shabdras #chads

शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

ख़फ़ा हूँ  !!

में तो क़ुदरत कि फ़ितरत से,

         ही खफा हूँ ,

ढूंढ़ता फिरता हूँ,
   
      में अपनी यादों को,

 पकड़ता फिरता हूँ ,

         बीते लमहों को ,

 वक़्त की चादर को,

         छूने को  बेताब हूँ

साँसों का थमना

        थमके फिर रुकना ,

में तो ज़िंदगी के,

       दस्तूर से ख़फ़ा हूँ !

रुकना ना फ़ितरत थी कभी ,

       अब रुक के चलने कहाँ तय्यार हूँ !    !! #Shabdras

शुक्रवार, 16 जून 2017

उड़ोगे दूर कितना तुम

उड़ोगे दूर कितना तुम,
     धरती ही साया  है !
भागोगे कब तक यूं ही तुम,
    हर कदम ही मंज़िल है !!

सोचो एक पल को तो,
  तुमने क्या खोया,
     और क्या  पाया है !

कहाँ से आये थे तुम भी,
   तुमने क्या देखा और जाना है !!

कहता था सिकंदर भी,
   वोह कहता जो ,
सम्राट अशोक भी था,
जीतूंगा दुनिया को ,
   मुट्ठी में करना था !

पड़े  शमशान में वोह हैं,
    यही जीवन की माया है !

थोड़ा रुक के इक पल भी,
    सबको तलब  करलो !
जो साथ में हैं  सब,
  उनका नमन कर लो !   #शब्दरस #Chads







सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

आज बरसों बाद

 आज बरसों बाद,
     यादों की पोटली खोली है,
  कुछ खट्टी, कुछ मीठी ,
      और कुछ नमकीन,
 यादें दबी हुयी थीं !

यादों को निकल कर,
     जब सजाया,
आपको हर जगह ,
    बिखरा सा पाया !

जितना समेटना ,
   हमने छाया ,
उतना दर्द हमने ही पाया !! Chads  - आशीष चड्ढा

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

वक़्त का दरिया

वक़्त का दरिया ,
    बहता जा रहा था ,
यादों  को किनारे पर ,
    समेटता जा रहा था !

बिखेर किनारों को ,
     ढूंडू कहाँ से ,
 में तो दरिया के संग, 
बहता जा रहा था !

होती जो मर्ज़ी , 
    थाम लेता में दरिया ,
छूटे किनारे को ,
    मिल कर बताता !

खाड़ी में जाकर , 
  सबको है गिरना ,
छूटे किनारों को ,
 देखना चाहता था  ! 

वक़्त का दरिया !! आशीष चड्ढा - Chads 

मेरे अंदर का द्वन्द मिटा

राम पुकारूँ. 
    रहीम पुकारूँ ,
या पुकारूँ येशु कहीं  !

किस नाम से पुकारूँ,
  ना जाने  तू,
छुपा कहीं  !!

बनाया एक माटी से सबको ,    
भर दिए उसने रंग अनेक !
ढूँडूं में,
     अपना रंग घर घर , 
देखो  भगवन,
     तुम अनेक !!

तराश रहा है,
     तू भी सबको ,
क्यों है, 
      सबको बाँट रहा !

इतनी नफ़रत , 
     क्यों मिलता, 
भाई भाई को ,
    काट रहा !!

जाता हूँ मैं ,
     सबसे लड़ने,
कितना है,
    यह द्वेष  भरा,
 पहले तो, 
     अपने को देखूँ ,
थोड़ा सा तो,
     प्यार जगा ,

मिलता है,
    जिस पल तू मुझको,
मैं तुझे ही,
  ढूंड  रहा,

 एक पल तो,
     मुझको मिल जा,
    मेरे अंदर का,
 द्वन्द मिटा !  #शब्दरस   आशीष चड्ढा -Chads 


English Translation - Not Exact but helpful to understand the poem.

!! God , Hare Krishna !!

Should I call you Ram. 
    or may call Rahim,
or may call Jesus ...

Not sure by what name I should I call you, 
        you hiding somewhere, 
I am not able to see from my eyes !!

Made everyone from same clay,     
    and filled filled different  colors,
 Made everyone so different !!

Searching every where to find my own color,
    you are present in so many different forms.

You are polishing everyone to get better person 
  still they are fighting is so divided and fighting !!

why so much hatred, 
why Brother and  brother, 
killing each other !!

I get ready to go out and fight,
fight with anger, revenge, hate
 firstly i should 
     Look at me,
get love for others !!

The moment I meet you, 
       I am living in so much ignorance that I am still searching you.

Want to meet you once to clear all the doubts I have !!

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

मेरा बेटा , मेरा बेटा

Dedicated the Fathers who have their children abroad and they are still waiting to get back:


जब जब डाकिया गली में आता था,
२ रूपए का नोट मेरी जेब से निकल आता था !

मैं  बार बार बस यही पूछता था ,
        क्या आज मेरे बेटे का खत आया था !

ज़िन्दगी जीने का तरीक़ा सिखलाया तुझे ,
   आज क्यों ज़िन्दगी, ही भूल गया मुझे !

आया पतझड़ , आयी बरखा ,
     आया सावन झूम के !
 तू नहीं आया ,  सारे आ गए !
   आएगा क्या पूरी दुनिया घूम के !!

आस लगाए बैठी है जो ,
   तेरी माँ यह कहती है !
मेरा बेटा , मेरा बेटा,
     गाती है वोह  झूम के !!

बहन तेरी राखी पर रोती ,
      रोती दिवाली और होली पर !
आजा मेरे लाल तू अब तो ,
     आज अखियां सोने को !!

सूरत तेरी आती है,
             जब जब मेरे सपनो में !
पूरे दिन की ठंडक देती ,
      मेरे दिल और धड़कन में !!

चौकीदार जब आता था ,
   सोजा बेटा , सोजा बेटा ,
        मैं  कहता जाता था ,
         
जब जब चौकीदार वोह आता ,
       सन्नाटा हो जाता है !
मेरा बेटा आने वाला ,
      ऐसा क्यों लग जाता है !!

मुझपर कुछ है ऋण भूमि का ,
   तुझपर भी अभी बाकि है !!

उसको ही चुकाने आजा,
  जब तक मेरी साँस बाकि है !








     





   





शनिवार, 26 नवंबर 2016

यादों में रहता हूँ , शायद !

श्रद्यांजलि: संदीप चड्ढा 

ज़िन्दगी हमें हर मोड़ पर सिखाती है, शायद !
    वक्त की चादर उड़ जाती है,  शायद  !
सुर्ख़ियों में रहूं ,
               या हवा में उड़ जाऊं, शायद !
दिल के झरोकों में रह रह कर याद दिलाता हूँ,  शायद !!

मिट्टी था,
     मिट्टी हूँ शायद !
भूलता नहीं ,
      यादों में रहता हूँ , शायद !

दोस्तों की कमीं न थी, शायद !
   अकेला ही चल पड़ा हूँ, शायद !

यादों में रहता हूँ , शायद ! #श

 - @आशीष चड्ढा - Chads