भगवान का शुक्र किया,
तो करता ही चला गया !
मैं तो कृष्ण के प्रेम में,
बहता ही चला गया !!
शुरू किया था,
दो ही अक्षर लिखना !
मैं तो फ़साना ही,
लिखता चला गया !!
ये श्वास,
ये खुशबू,
ये नज़ारे,
मैं तो खुशी में,
समाता ही चला गया !
कृष्ण की मुरली की,
तान सुनकर !
मैं अपने मन को,
भुलाता ही चला गया।
चलता चला जाऊं,
मैं यूं ही रास्ते पर !!
कृष्ण के शुक्र में,
करता ही चला जाऊं !
हर मोड़ पर, उनकी लीला को देखूं,
हर कदम पर उनके नाम को जपूं !!
तेरा नाम ही,
मेरी साधना बने !
तेरे चरण ही,
मेरी यात्रा बने !!
शुरू किया जो,
प्रेम का सफर !
कृष्ण, तुझमें ही,
मैं खोता चला गया !!
शब्द खत्म हों,
पर प्रेम न रुके !
तेरी महिमा का गान,
कभी न थमे !
भगवान का शुक्र किया,
तो करता ही चला गया !
मैं तो कृष्ण के प्रेम में,
बहता ही चला गया !!