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शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

मेरा बेटा , मेरा बेटा

Dedicated the Fathers who have their children abroad and they are still waiting to get back:


जब जब डाकिया गली में आता था,
२ रूपए का नोट मेरी जेब से निकल आता था !

मैं  बार बार बस यही पूछता था ,
        क्या आज मेरे बेटे का खत आया था !

ज़िन्दगी जीने का तरीक़ा सिखलाया तुझे ,
   आज क्यों ज़िन्दगी, ही भूल गया मुझे !

आया पतझड़ , आयी बरखा ,
     आया सावन झूम के !
 तू नहीं आया ,  सारे आ गए !
   आएगा क्या पूरी दुनिया घूम के !!

आस लगाए बैठी है जो ,
   तेरी माँ यह कहती है !
मेरा बेटा , मेरा बेटा,
     गाती है वोह  झूम के !!

बहन तेरी राखी पर रोती ,
      रोती दिवाली और होली पर !
आजा मेरे लाल तू अब तो ,
     आज अखियां सोने को !!

सूरत तेरी आती है,
             जब जब मेरे सपनो में !
पूरे दिन की ठंडक देती ,
      मेरे दिल और धड़कन में !!

चौकीदार जब आता था ,
   सोजा बेटा , सोजा बेटा ,
        मैं  कहता जाता था ,
         
जब जब चौकीदार वोह आता ,
       सन्नाटा हो जाता है !
मेरा बेटा आने वाला ,
      ऐसा क्यों लग जाता है !!

मुझपर कुछ है ऋण भूमि का ,
   तुझपर भी अभी बाकि है !!

उसको ही चुकाने आजा,
  जब तक मेरी साँस बाकि है !