Dedicated the Fathers who have their children abroad and they are still waiting to get back:
जब जब डाकिया गली में आता था,
२ रूपए का नोट मेरी जेब से निकल आता था !
मैं बार बार बस यही पूछता था ,
क्या आज मेरे बेटे का खत आया था !
ज़िन्दगी जीने का तरीक़ा सिखलाया तुझे ,
आज क्यों ज़िन्दगी, ही भूल गया मुझे !
आया पतझड़ , आयी बरखा ,
आया सावन झूम के !
तू नहीं आया , सारे आ गए !
आएगा क्या पूरी दुनिया घूम के !!
आस लगाए बैठी है जो ,
तेरी माँ यह कहती है !
मेरा बेटा , मेरा बेटा,
गाती है वोह झूम के !!
बहन तेरी राखी पर रोती ,
रोती दिवाली और होली पर !
आजा मेरे लाल तू अब तो ,
आज अखियां सोने को !!
सूरत तेरी आती है,
जब जब मेरे सपनो में !
पूरे दिन की ठंडक देती ,
मेरे दिल और धड़कन में !!
चौकीदार जब आता था ,
सोजा बेटा , सोजा बेटा ,
मैं कहता जाता था ,
जब जब चौकीदार वोह आता ,
सन्नाटा हो जाता है !
मेरा बेटा आने वाला ,
ऐसा क्यों लग जाता है !!
मुझपर कुछ है ऋण भूमि का ,
तुझपर भी अभी बाकि है !!
उसको ही चुकाने आजा,
जब तक मेरी साँस बाकि है !