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शनिवार, 28 दिसंबर 2024

फिर देख, वो सुबह आएगी

फिर देख, 

    वो सुबह आएगी !

जो अश्कों को मुस्कानों में बदल जाएगी !!


हर दर्द की,

     कहानी भूल जाएगी !

हर चाहत को,

     मंज़िल दिलाएगी !!

चुप थे जो दिल, 

        वो बोलेंगे !

टूटे सपने फिर,

         से जोड़ेंगे !!


फिर देख, 

    वो सुबह आएगी !

जो हर दिल को,

     रोशन कर जाएगी !!


ख़ामोशी का शोर,

     सुनाई देगा !

हर ग़म का चेहरा,

     छुपाई देगा !!

जो बिछड़ गए, 

    वो मिल जाएंगे !

जो रूठे थे, 

       वो हँस जाएंगे !!


फिर देख, 

    वो सुबह आएगी !

जो हर दिल को,

     रोशन कर जाएगी !!


मगर वो सुबह,

     दूर है अभी !

रात का साया है,

     गहरा सभी!!

पर हर अंधेरा,

     कट जाएगा !

जब उम्मीद का,

     सूरज चमक जाएगा!!

फिर देख, 

    वो सुबह आएगी !

हर दर्द के साथ,

     एक मुस्कान होगी !

और ज़िंदगी फिर से,

     आसान होगी !

फिर देख, 

    वो सुबह आएगी !! #shabdras

शनिवार, 11 सितंबर 2021

हरे कृष्णा बोलूं , हरे कृष्णा बोलूं !

 हरे कृष्णा बोलूं , हरे कृष्णा बोलूं !

    तेरे नाम, 

में ही डोलूं , 

        हरे कृष्णा बोलूं !

        हरे कृष्णा बोलूं ! !

    सुख में,

         और दुःख में, 

                कृष्णा (long ) ढूंडू ,

        हरे कृष्णा बोलूं !

         हरे कृष्णा बोलूं !!

सच्चे रस्ते,

     पर चलूँ, 

    कृष्णा कृष्णा बोलूं, 

        हरे कृष्णा बोलूं !

          हरे कृष्णा बोलूं !!

तेरे नाम. 

    को ,

    अपने अंदर ढूंढूं, 

        हरे कृष्णा बोलूं !

        हरे कृष्णा बोलूं !!


तेरे से, 

    बिछड़ के,

     दुःख में डूबूं, 

    हरे कृष्णा बोलूं  !

    हरे कृष्णा बोलूं  !!


Speak Hare Krishna, Speak Hare Krishna!

    In your name, I will wave in your name,

        Say Hare Krishna!

    In happiness and in sorrow, find Krishna (long),

        Say Hare Krishna!!

Let me follow the true path, say Krishna Krishna,

        Say Hare Krishna!!

Let me find your name in me, I will say Hare Krishna!

        Say Hare Krishna!!

I will drown in the sorrow of separation from you, I should say Hare Krishna

  Say Hare Krishna!!






बुधवार, 24 मई 2017

अमेरिका में रेल की सवारी


अमेरिका में रेल की सवारी
सोचा था फिर से,   रेल गाड़ी पकड़ेंगे !
रेलगाड़ी ने ,
पुरानी यादें ताज़ा कर दीं !

हर स्टेशन को वीराना सा पाया ,
       ना कोई शोर ,
और ना कोई चाय-चाय बुलाता आया !
काश हम उतरते,
    कहीं पकोड़े,
 और कहीं चाय  का खुलड़ उठाते ,
कहीं से बच्चों को चंपक और चंदामामा दिलाते !

ना कुछ बेचने वाले दिखते हे,
ना कोई सवारी ,
कुली का शोर दिखा नहीं ,
दिखे तो बस चंद सवारियाँ ,
अपनी अपनी दिशाओं को जाती,
मुस्कुराती, 
लेकिन अपनी रेलगाड़ी की याद दिलाती !!       #शब्दरस chads

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

यह पतझड़ का मौसम

यह पतझड़ का मौसम,
    आया है,
भगवान  ने रंगों को जैसे,
    तबियत से बिछाया है !

सुहाना यह मौसम,
     करता दीवाना ,
जैसे चाहता है,
    मेरी ज़िन्दगी की परतों को दिखाना !

अपने रंगों में इसको,
      तुमको है छिपाना,
वोह दर्द लपेटे,
       यह केसा मस्ताना !

दिखता, जाता, बताता,
 फिर आएगा मौसम सुहाना !

यह पतझड़ का मौसम !! - आशीष चड्ढा - Chads

मुझे खेद है

मुझे खेद है

न नेताओं की भ्रस्टाचारी से ,
        न उनके झूटे वादों से,
 मुझे खेद है तो बस,
       आपका बार बार,
उनके चिन्ह पर मोहर लगाने से !

ना भ्रष्टकर्मचारियों से ,
     न उनकी कामचोरी से ,
मुझे तो बस खेद है ,
   आपके उनके हाथ में नोट थमने ,
और काम करवाने से !!

न पडोसी देश से,
    न परदेस से,
मुझे तो बस खेद है ,
   अपने देश के लोगों को,
एक दुसरे पर हतियार उठाना से !


न शोषण से ,
   न कुपोषण से ,
मुझे तो खेद है,
   उस बच हे भोजन को फेंक कर,
         हुए प्रदोषशण से !


मुझे खेद है !! - आशीष चड्ढा - Chads

अपने मन में सुंदरता को ढूँढा करो !

आँखे बंद करके,      
     कभी भगवान का ,
        नमन किया करो ,
 कभी माया छोड़ कर, 
    दूसरों के दुखों का,
        भ्रमड़ किया करो !

लाए नहीं थे ,
    दुनिया में तुम कुछ ,
किसके जाने का डर है ,
   अपनी नींद तो पूरी किया करो !
    
माया ने लिया है, 
   सारा जीवन तुम्हारा,
अब तो उसको छोड़ो , 
    कभी ज़िंदगी को भी,
 पास से देखा करो !

माया बेवफ़ा है, 
   ना रहेगी हमेशा ,
उसको छोड़कर,
   कभी दोस्ती को साथ ,
जोड़ा करो ! 

ज़िन्दगी है छोटी ,
    ना करना घमंड ,
    अपने मन में ,
सुंदरता को ढूँढा करो ! आशीष चड्ढा - Chads 



सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

ज़िंदगी जीना भुला बेठे हैं

ज़िंदगी जीना भुला बेठे हैं, 
      हमसे क्या पूछो सनम, 
हम तो जाने,
      किस ज़ालिम  से,
दिल लगा बैठे हैं  !

भेजा गया था, 
    जो जीने के लिए, 
हम उसी को भुला कर,
     बस माया के साथ ही,
 हर पल बिठा बेठे हैं !


देखा राजाओं को जीते, 
   जीते जीत कर उनको, 
रंक बनते ,
    जीने के लिए मरते  !

हम तो अब जीने को ही ,
    अपने जीने का मक़सद बना बेठे हैं !

ढूँढते हे ख़ुशी,  
      छोटी छोटी बातों में,
अब तो बातों को ही, 
     जीने का मक़सद बना बैठें हैं !

तेरा बोहोत बोहोत शुक्रिया मेरे भगवन, 
  हम तो तेरी दुनिया को देख कर,
   सब कुछ पा बेठे हैं !

ज़िंदगी जीना भुला बेठे हैं !!  आशीष चड्ढा -Chads 

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

शिक्षा पाना कितना था सुहाना : Old Indian Education System

कितना  विचित्र,
       वोह  ज़माना था !
छात्र खुद ही,
       शिक्षा का दीवाना था !!

गुरुकुल को जाना था,
       यही हर बच्चे का सपना था !!

नालंदा हो,
       या तक्षशिला !
 छात्रों और शिक्षषों से था,
       वोह हरा भरा !!

वेदों का पाते थे,
       ज्ञान वोह,
आर्युवेद का था,
       उनको सम्मान  जो !

शिक्षा पाना कितना था सुहाना !! आशीष चड्ढा - Chads





The Poem talks about the old education system in India. It used to be very different than the current education system. Focus on overall development of the child rather than following monotonous standards. Although education was not available for every child.






सोमवार, 12 दिसंबर 2016

वोह काला बादल आया है !

घनघोर अँधेरा छाया है ,
   वोह काला बादल आया है !
अपने अंदर समेटे वोह कितनी बूंदे लाया है !!

घनघोर भी है,
     विक्राल भी है,
वोह गरजे बरसे, गरड़ - गरड़ ,
    हर पल में डर जाता हूँ,
क्यों सन्नाटा यह छाया है !!

में भागूं उस्से दूर दूर,
    वोह पीछे आये झूम झूम,
कितनी ज़ोर से वोह ,
      हवा के झोकें लाया है !

वोह प्यार भी है,
    झनकार भी है !
मस्ती की पुकार भी है !
     वोह शाम सवेरे आया है !!

      वोह काला बादल आया है !! 

आशीष चड्ढा - Chads






शनिवार, 3 दिसंबर 2016

सामाजिक जालक्रम - Social Media

Impact Of Social Media


सामाजिक  से ,
       अब सामाजिक जालक्रम बन कर रह गया हूँ, -- Social से Social Media !!

चिंटू , मिंटू अब पुराने गए हैं,
सोशल मीडिया पर अब सब फेसबुक [Facebook]  और व्हाट्सएप्प  [WhatsApp] के दीवाने हो गए हैं !

कभी खेल कूद से वक़्त निकाल लिया करते थे ,
   अब मीडिया पर दूर से खेल देख कर जी  रहे हैं !

पहले बिना फ़ोन के दोस्तों को ढून्ढ लिया करते थे ,
   अब दोस्तों को फ़ोन करने के लिए भी टाइम ढूँढ़ते फिर रहे हैं !

उनके आने की खुशबु का इंतज़ार किया करते थे ,
  अब उनके DP बदलने का इंतज़ार किया करते हैं !

जो शाम को निकल कर दीदार ये यार किया करते थे ,
     अब फोटो को पलटते फिर रहे हैं !!

जो सारे दोस्त कभी ख़ास हुआ करते थे,
अब अपने सेकड़ो संपर्को में ,
    दोस्त ढूँढ़ते फिर  रहे   हैं !!

जो उनके साथ रहने का एहसास किया करते थे ,
   अब उन लम्हों को बस सेल्फी में ही कैद किया  करते हैं !

जो घर में सबसे बात किया करते थे हर दम
    अब प्रभात और संध्या भी फेसबुक पर किया करते हैं !


Social Media को समर्पित - आशीष चड्ढा - Chads