ज़िंदगी जीना भुला बेठे हैं,
हमसे क्या पूछो सनम,
हम तो जाने,
किस ज़ालिम से,
दिल लगा बैठे हैं !
दिल लगा बैठे हैं !
भेजा गया था,
जो जीने के लिए,
हम उसी को भुला कर,
बस माया के साथ ही,
हर पल बिठा बेठे हैं !
हर पल बिठा बेठे हैं !
देखा राजाओं को जीते,
जीते जीत कर उनको,
रंक बनते ,
जीने के लिए मरते !
हम तो अब जीने को ही ,
अपने जीने का मक़सद बना बेठे हैं !
ढूँढते हे ख़ुशी,
छोटी छोटी बातों में,
अब तो बातों को ही,
जीने का मक़सद बना बैठें हैं !
तेरा बोहोत बोहोत शुक्रिया मेरे भगवन,
हम तो तेरी दुनिया को देख कर,
सब कुछ पा बेठे हैं !
ज़िंदगी जीना भुला बेठे हैं !! आशीष चड्ढा -Chads