!! Hindi Poem dedicated to Indian Youth !!
इन्कलाबे जोश,
बढ़ने
लगा है,
सैलाबे वतन,
होने लगा है
!
लगेंगे खून के
अंगारें,
न होगा गम,
सर ज़मीं की
कसम,
न जोश होगा
कम !
तुझपर मर मिटेंगे,
सोचा कभी,
आज वक्त है
सामने,
आगे तू बड़
!
उठा जो बस
मे है तेरे,
धर पकड़,
जो हद है
तेरी,
तू काम कर
!
तुझसे आस है
लगाये,
वंशज तेरे ,
करेगा नए युग
का निर्माण तू
,
मौका भी है,
दस्तूर भी,
अब तू झपट,
वक्त की चादर को तू
पलट !
भारत का राहगीर
तू बन !!
- Chads - शब्दरस