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सोमवार, 30 दिसंबर 2024

नया भारत : छत्रपति शिवाजी

Dedicated to Shiva Jee 


हाथ में तलवार लिए, 

           सिंहासन पर वीर !

छत्रपति शिवाजी, 

         जिनसे कांपे अधीर !!

मुट्ठी भर सैनिक, 

        पर साहस था अपार !

रणभूमि में वो लड़े, 

        रचा नया इतिहास !!

हर पर्वत,  हर किला,

     गूंजे उनकी शान !

शिवाजी का नाम है,

     भारत की पहचान !!

जय हो, जय हो, 

    मराठा के शेरों !

जय हो, जय हो, 

    भारत के वीर !!


छोटी सी सेना दिखे,

       पर थे चतुर चालाक !

गोरिल्ला युद्ध से हराया,

         दुश्मनों का राग !!


सूर्यगढ़ का किला, 

        अफजल का गुरूर !

शिवाजी ने तोड़ा, 

        बनाया नया नूर !!


कौटिल्य की नीति, 

        और साहस का संग !

छत्रपति का परचम,

         लहराए हर रंग !!


जय हो, जय हो, उनके सपनों की,

जय हो, जय हो, उनके अपनों की !!


आदर्श थे जनता के,

     न्याय में महान,


धर्म और संस्कृति के,

     सच्चे रखवाल !

मुगलों को दिखाया, 

    स्वराज का रंग,

छत्रपति ने,

     भारत को दिया नया ढंग !!

हर नर गाए, 

        उनकी गौरव गाथा,

शिवाजी की वीरता,

        से बना ये नाता !


जय हो, जय हो, भारत के प्रहरी की,

जय हो, जय हो, उस अमर कहानी की !!


छत्रपति का साहस, 

        हर दिल में आज भी है !

नया भारत बनाएंगे, 

        वही जोश रगों में है !!


जय हो, जय हो, उनके स्वराज की,

जय हो, जय हो, इस नयी शुरुआत की !! #shabdras

रविवार, 22 दिसंबर 2024

फिर देख, वो सुबह आएगी

फिर देख, वो सुबह आएगी,

हर दिल में ईमानदारी लाएगी।

न कोई रिश्वत, न कोई छल होगा,

हर रास्ता सच्चाई का पल होगा।


हर नेता, हर अधिकारी सच्चा,

हर इंसान का इरादा पक्का।

जहां न्याय का होगा राज,

हर भारतवासी बनेगा वीर और आज।


सोने की चिड़िया फिर कहलाएंगे,

गोल्डन हार्ट से भारत सजाएंगे।

हर कोना चमकेगा उजालों से,

हर सपना पूरा होगा अरमानों से।


ज्ञान, विज्ञान में होंगे महान,

दुनिया फिर कहेगी भारत महान।

सत्य, सेवा, और प्रेम का होगा वास,

नए भारत में होगा स्वर्णिम प्रकाश।


फिर देख, वो सुनहरी घड़ी आएगी,

हर मुश्किल राहों को सरल बनाएगी।

भारत बनेगा जग का सिरमौर,

हर दिल में होगा उसका गौरव और जोर।

शनिवार, 4 मार्च 2017

इस युग का मार्ग प्रदर्शक बन

सपुत्र मैं इस भूमि का,  
    संदेश यह लेकर आया हूँ
तू निर्भय है,      
    तू शोभित बन
तू इस युग का मार्ग प्रदर्शक बन !

हिमालय खड़ा है,
       बटने को
    कश्मीर वो हमसे माँग रहे,
क्या लगता है तुमको है वो
       प्यार से यूँ ही मान रहे !

वीरों ने दिया बलिदान जो है,   
   पुत्रों के शीश चढ़ाए हैं ,
बहनो ने अपने सुहागों से,    
   धरती का मान बचाया है !

वोह ताज की ज्वाला क्यों भूलूँ ,   
      वोह मुंबई को जलता क्यों देखूँ,
वोह आँख लगाए बेठा है
      मैं  उस आँख को यूँ केसे देखूँ ! 
मैं  पूरब हूँ ,   
    वोह पश्चिम है ,
मैं  उत्तर हूँ,   
    वोह दक्षिण हैं  
मैं  प्यार का हाथ बड़ता हूँ,    
   वोह पीठ पर वार चलता है
वोह कारगिल में बेठा था,    
   धोखा और द्वेष लिए,
मैं  केसे चुप रहा जाता था ,    
   वोह मुझको ही ललकार रहा !

मिलना गंगा का जमुना में,     
   भाता सबको है , 
     ह्रदेय से
कर देता खंडित - खंडित है,   
   जो थोड़ा सा खोट मिला ,
      उस पावन  गंगा जल मे है !

माना , सिन्ध बिना ना होता,     
    मे्रे  हिद का सपना हे,  
बाँह फ़ेलकर साथ मैं  दूँ ,      
    जो बनता वोह अपना है,
यह दूरियां ख़तम हो सकतीं , 
    आतंकवाद मिटाना ही,     
      अगर दोनो का सपना है  !!  #shabdras


बुधवार, 21 दिसंबर 2016

व्यंग बन गया हूँ मैं

व्यंग बन गया हूँ मैं  !!

व्यंग बन गया हूँ में ,
  कभी जाती के नाम पर,
  कभी रंग बिरंगे नेताओं के वादों की भरमार पर !

कभी निर्मम की क्रूरता से ,
  तो कभी तुम्हारी निर्मलता से !

व्यंग बन गया हूँ मैं  !!

राम की जन्म भूमि मेरी ,
  कृष्ण के नटखटपन से भरी !
शिवा का प्रकोप यह ,
 बजरंगी है बलवान पुत्र मेरा !

फिर क्यों  !
व्यंग बन गया हूँ मैं  !!

वीरों का आँगन  मेरा ,
     बलिदानो से जो है भरा ,
फिर क्यों कहना पड़ा !

व्यंग बन गया हूँ मैं  !!



शनिवार, 19 नवंबर 2016

चलो आज देश बनाते हैं


चलो आज देश बनाते हैं ,


चलो आज देश बनाते हैं ,
  कुछ अपनी ,  कुछ तुम्हारी सबको बताते हैं !!

धुप निकली है,  
     फिर से आज़ादी के बाद !
उसको समेट कर ,
चलो सबको बुलाते हैं !
    चलो आज देश बनाते हैं !!

धुप में भी सियासत जारी है ,
    कभी उनकी , तो कभी हमारी बारी है !
चलो सियासत को भूलते हैं ,
   चलो देश बनाते हैं !!

"' धुप बोली -->" 

अबकी निकली हूँ,  तो यूं नहीं जाऊंगी !!
    शाम तक कुछ को गर्मी ,
तो कुछ को अपने साथ लेकर जाऊंगी !! [ Saying to corrupt people]

जो लगे गर्मी , 
   तो  घबराना  न तुम  !
जो गए घबरा ,
 तो क्या दोगे साथ तुम ,
मुझे क्या काले बदल में  छिपा दोगे तुम !!


युवा हो तुम,
 अब भी सोच लो !
कला सफ़ेद करते रहो मेरे दोस्त ,
या ज़िन्दगी जीना सीख लो !!

ज़िन्दगी का क्या,
  आधी निकल गयी, बाकि निकल जाएगी !
अगर यूं ही जीते रहे ,
 तो तुम्हारी नहीं, 
    तुम्हारे वंशजों  की क्या जीने की बारी आएगी !!

माना सब चोर हैं ,
       कोई थोड़ा , तो कोई बड़ा चोर है !
कहीं से तो शुरुवात होगी ,
        तो चलो छोटा  ही सही ,
            लेकिन ईमानदारी का फूल खिलते हैं !
चलो देश बनाते हैं !!

राह कठिन , और यह  धुप कुछ आज बुलंद है !
   ऊपर तक जाते हैं ,
अपने देश को सबसे विकसित बनाते हैं 
चलो देश बनाते हैं !!

छोड़ दो यह बातें , यह सियासत !
      यह विकृत लोगों की मनकहीं बातें !!

 आज दिल की सुनते हैं, दिमाग से सोचते हैं !
अपने काले धन को नहीं , 
      अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य को देखते हैं  !
 चलो देश बनाते हैं !!

कभी सोचो , जब यह काल धन ना होगा !
       तो कहाँ से हथियार आएंगे !
 और वोह अपने भाइयों  को आतंकवादी बनाएंगे !!

  चलो अब अपनी करते हैं , 
        चलो देश बनाते हैं !!










   

शनिवार, 31 अक्टूबर 2015

सूखी, भीगी, सुलगती आँखें

कुछ पंगतियाँ देश की वर्तमान स्थिति पर !! 

आज़ादी के इतने वर्ष भी, इंतज़ार करती आँखें !
    सूखी, भीगी, सुलगती आँखें !!

 इन आँखों ने, हमेशा से लड़ता हुआ देखा है !
    इस विविधता को बिखरता हुआ देखा है !!

 जो आँखों में अँगारें हों, तो वतन की सीमा पर जाकर उगलो  !
   अपनो को जलाकर, क्या मिलेगा तुम्हें  !!

जो रक़्त है भारत माँ का, तो यह लड़ाई क्यूँ !
   धर्म के नाम पर यह आतंकवाद क्यों !!


"साहित्यकारों को सम्मान वापस करते कुछ शब्द लिख रहा हूँ "
 
जो आपको मिले सम्मान,  तो करो सम्मान इनका !
   विषुब्ध हो, तो छलनी कर दो अपनी कलम से !!

जो कलम में है सच,  तो देश होगा तुम्हारा !
 सियासत में, कलम टोड़ा नही करते !
         बेवकूफों के साथ जुड़ा  नही करते !!

                                         @आशीष चड्ढा - Chads

मंगलवार, 30 अगस्त 2011

युवा : राहगीर  तू बन

!! Hindi Poem dedicated to Indian Youth !!

इन्कलाबे जोश,  
      बढ़ने  लगा है,
सैलाबे वतन,
     होने लगा है !

लगेंगे खून के अंगारें,
     न होगा गम,
सर ज़मीं की कसम, 
    न जोश होगा कम !

तुझपर मर मिटेंगे, 
    सोचा कभी,
आज वक्त है सामने, 
   आगे तू बड़ !

उठा जो बस मे है तेरे, 
   धर पकड़,
जो हद है तेरी, 
  तू काम कर !

तुझसे आस है लगाये, 
  वंशज तेरे ,
करेगा नए युग का निर्माण तू ,

मौका भी है,
  दस्तूर भी, 
अब तू झपट, 
  वक्त की चादर को तू पलट !

भारत का राहगीर तू बन !!
                                                                       - Chads - शब्दरस