व्यंग बन गया हूँ मैं !!
व्यंग बन गया हूँ में ,
कभी जाती के नाम पर,
कभी रंग बिरंगे नेताओं के वादों की भरमार पर !
कभी निर्मम की क्रूरता से ,
तो कभी तुम्हारी निर्मलता से !
व्यंग बन गया हूँ मैं !!
राम की जन्म भूमि मेरी ,
कृष्ण के नटखटपन से भरी !
शिवा का प्रकोप यह ,
बजरंगी है बलवान पुत्र मेरा !
फिर क्यों !
व्यंग बन गया हूँ मैं !!
वीरों का आँगन मेरा ,
बलिदानो से जो है भरा ,
फिर क्यों कहना पड़ा !
व्यंग बन गया हूँ मैं !!