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बुधवार, 21 दिसंबर 2016

व्यंग बन गया हूँ मैं

व्यंग बन गया हूँ मैं  !!

व्यंग बन गया हूँ में ,
  कभी जाती के नाम पर,
  कभी रंग बिरंगे नेताओं के वादों की भरमार पर !

कभी निर्मम की क्रूरता से ,
  तो कभी तुम्हारी निर्मलता से !

व्यंग बन गया हूँ मैं  !!

राम की जन्म भूमि मेरी ,
  कृष्ण के नटखटपन से भरी !
शिवा का प्रकोप यह ,
 बजरंगी है बलवान पुत्र मेरा !

फिर क्यों  !
व्यंग बन गया हूँ मैं  !!

वीरों का आँगन  मेरा ,
     बलिदानो से जो है भरा ,
फिर क्यों कहना पड़ा !

व्यंग बन गया हूँ मैं  !!