Like us ON FB

सोमवार, 12 दिसंबर 2016

वोह काला बादल आया है !

घनघोर अँधेरा छाया है ,
   वोह काला बादल आया है !
अपने अंदर समेटे वोह कितनी बूंदे लाया है !!

घनघोर भी है,
     विक्राल भी है,
वोह गरजे बरसे, गरड़ - गरड़ ,
    हर पल में डर जाता हूँ,
क्यों सन्नाटा यह छाया है !!

में भागूं उस्से दूर दूर,
    वोह पीछे आये झूम झूम,
कितनी ज़ोर से वोह ,
      हवा के झोकें लाया है !

वोह प्यार भी है,
    झनकार भी है !
मस्ती की पुकार भी है !
     वोह शाम सवेरे आया है !!

      वोह काला बादल आया है !! 

आशीष चड्ढा - Chads