घनघोर अँधेरा छाया है ,
वोह काला बादल आया है !
अपने अंदर समेटे वोह कितनी बूंदे लाया है !!
घनघोर भी है,
विक्राल भी है,
वोह गरजे बरसे, गरड़ - गरड़ ,
हर पल में डर जाता हूँ,
क्यों सन्नाटा यह छाया है !!
में भागूं उस्से दूर दूर,
वोह पीछे आये झूम झूम,
कितनी ज़ोर से वोह ,
हवा के झोकें लाया है !
वोह प्यार भी है,
झनकार भी है !
मस्ती की पुकार भी है !
वोह शाम सवेरे आया है !!
वोह काला बादल आया है !
अपने अंदर समेटे वोह कितनी बूंदे लाया है !!
घनघोर भी है,
विक्राल भी है,
वोह गरजे बरसे, गरड़ - गरड़ ,
हर पल में डर जाता हूँ,
क्यों सन्नाटा यह छाया है !!
में भागूं उस्से दूर दूर,
वोह पीछे आये झूम झूम,
कितनी ज़ोर से वोह ,
हवा के झोकें लाया है !
वोह प्यार भी है,
झनकार भी है !
मस्ती की पुकार भी है !
वोह शाम सवेरे आया है !!
वोह काला बादल आया है !!