काश तुम्हे बताया होता
काश तुम्हे बताया होता ,
अपना दिल ए हाल, खुल के सुनाया होता !
क्यों तुम्हे देख कर हो जाते हैं होंठ बंद मेरे ,
तुम्हे जी भर के बताया होता !!
तुमसे वोह रोज़ रोज़ की तकरार ,
मुझे क्यों न जाने आने लगा था उस पर प्यार !
छुप छुप के तुम्हे यूं देखना ,
काश तुम्हे एक बार बताया होता !!
तुम्हारा खिलखिलाना, वोह लड़कपन,
वोह बात बात पर शर्माना !
याद आता है मुझे,
वोह मिलना , वोह घंटों बात करना ,
वोह बातों को देर तक सोचना !!
अब भी चौंक कर उठ जाता हूँ में ,
जब भी तुम मेरे सपने में आती हो !
लेकिन फिर क्यों इतना दूर चली जाती हो !!
पकड़ने जाता हूँ में जैसे,
तुम दूर कहीं छुप जाती हो !!
एक बार तो कह दो,
कभी , याद करती हो मुझे !
झूट ही सही,
समझा दो जीने का अर्थ मुझे !!
कभी तो , किसी मोड़ पर मुलाकात होगी ,
बस यही आशा करता हूँ !
कि वोह जीना का अंत नहीं ,
एक नयी शुरुवात होगी !! @Chads - आशीष चड्ढा