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रविवार, 11 दिसंबर 2016

काश तुम्हे बताया होता

काश तुम्हे बताया होता ,
    अपना दिल ए हाल,  खुल के सुनाया होता !
क्यों तुम्हे देख कर हो जाते हैं होंठ बंद मेरे ,
    तुम्हे जी भर के बताया होता !! 
तुमसे वोह रोज़ रोज़ की तकरार ,
    मुझे क्यों न जाने आने लगा था उस पर प्यार !
छुप छुप के तुम्हे यूं देखना ,
   काश तुम्हे एक बार बताया होता !! 
तुम्हारा खिलखिलाना, वोह लड़कपन,
   वोह बात बात पर शर्माना !
याद आता है मुझे,
    वोह मिलना , वोह घंटों बात करना ,
 वोह बातों को देर तक सोचना !! 
अब भी चौंक कर उठ जाता हूँ में ,
   जब भी तुम मेरे सपने में आती हो !
लेकिन फिर क्यों इतना दूर चली जाती हो !!
पकड़ने जाता हूँ में जैसे,
    तुम दूर कहीं छुप जाती हो !! 
एक बार तो कह दो,
   कभी , याद करती हो मुझे  !
 झूट ही सही,
   समझा दो जीने का अर्थ मुझे  !! 
कभी तो , किसी मोड़ पर मुलाकात होगी ,
   बस यही आशा करता हूँ !
कि वोह जीना का अंत नहीं ,
     एक नयी शुरुवात होगी !!     @Chads - आशीष चड्ढा