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सोमवार, 5 दिसंबर 2016

थोड़ी चंचल हैं, थोड़ी नाज़ुक

थोड़ी चंचल हैं, थोड़ी नाज़ुक हैं,
       उनकी अदा सबपर भारी है !
 मुस्कुरा दें तो कसम से मर जाएंगे ,
       जो खामोश रहीं,  तो यूं क्या जी पाएंगे  !!

आँखों में नशा,  लबों पर गुलाब है !
       आवाज़ में शहद जैसी कुछ मिठास है !!

चलती हैं ,
       तो सांसे थम जाती हैं !
रूकती हैं , तो समां बाँध जाती हैं !!

नाश है, मदहोशी भी है !
    साथ में  है,  और ख़ामोशी भी है !!

चाँद कह दूं, तो शरम से छुप जाये  वोह !
        शरम की उनको हटाये कौन !!

आँखों का झुकना , वोह उनका शर्माना !
    जाने अब इनसे हमें बचाये कौन !!

 कसम से हम मर न जाते ,
     इस सपने से हमें जगाये कौन !!   Chads - आशीष चड्ढा