थोड़ी चंचल हैं, थोड़ी नाज़ुक हैं,
उनकी अदा सबपर भारी है !
मुस्कुरा दें तो कसम से मर जाएंगे ,
जो खामोश रहीं, तो यूं क्या जी पाएंगे !!
आँखों में नशा, लबों पर गुलाब है !
आवाज़ में शहद जैसी कुछ मिठास है !!
चलती हैं ,
तो सांसे थम जाती हैं !
रूकती हैं , तो समां बाँध जाती हैं !!
नाश है, मदहोशी भी है !
साथ में है, और ख़ामोशी भी है !!
चाँद कह दूं, तो शरम से छुप जाये वोह !
शरम की उनको हटाये कौन !!
आँखों का झुकना , वोह उनका शर्माना !
जाने अब इनसे हमें बचाये कौन !!
कसम से हम मर न जाते ,
इस सपने से हमें जगाये कौन !! Chads - आशीष चड्ढा
उनकी अदा सबपर भारी है !
मुस्कुरा दें तो कसम से मर जाएंगे ,
जो खामोश रहीं, तो यूं क्या जी पाएंगे !!
आँखों में नशा, लबों पर गुलाब है !
आवाज़ में शहद जैसी कुछ मिठास है !!
चलती हैं ,
तो सांसे थम जाती हैं !
रूकती हैं , तो समां बाँध जाती हैं !!
नाश है, मदहोशी भी है !
साथ में है, और ख़ामोशी भी है !!
चाँद कह दूं, तो शरम से छुप जाये वोह !
शरम की उनको हटाये कौन !!
आँखों का झुकना , वोह उनका शर्माना !
जाने अब इनसे हमें बचाये कौन !!
कसम से हम मर न जाते ,
इस सपने से हमें जगाये कौन !! Chads - आशीष चड्ढा