चलो आज देश बनाते हैं ,
चलो आज देश बनाते हैं ,
कुछ अपनी , कुछ तुम्हारी सबको बताते हैं !!
धुप निकली है,
फिर से आज़ादी के बाद !
उसको समेट कर ,
चलो सबको बुलाते हैं !
चलो आज देश बनाते हैं !!
धुप में भी सियासत जारी है ,
कभी उनकी , तो कभी हमारी बारी है !
चलो सियासत को भूलते हैं ,
चलो देश बनाते हैं !!
"' धुप बोली -->"
अबकी निकली हूँ, तो यूं नहीं जाऊंगी !!
शाम तक कुछ को गर्मी ,
तो कुछ को अपने साथ लेकर जाऊंगी !! [ Saying to corrupt people]
जो लगे गर्मी ,
तो घबराना न तुम !
जो गए घबरा ,
तो क्या दोगे साथ तुम ,
मुझे क्या काले बदल में छिपा दोगे तुम !!
युवा हो तुम,
अब भी सोच लो !
कला सफ़ेद करते रहो मेरे दोस्त ,
या ज़िन्दगी जीना सीख लो !!
ज़िन्दगी का क्या,
आधी निकल गयी, बाकि निकल जाएगी !
अगर यूं ही जीते रहे ,
तो तुम्हारी नहीं,
तुम्हारे वंशजों की क्या जीने की बारी आएगी !!
माना सब चोर हैं ,
कोई थोड़ा , तो कोई बड़ा चोर है !
कहीं से तो शुरुवात होगी ,
तो चलो छोटा ही सही ,
लेकिन ईमानदारी का फूल खिलते हैं !
चलो देश बनाते हैं !!
राह कठिन , और यह धुप कुछ आज बुलंद है !
ऊपर तक जाते हैं ,
अपने देश को सबसे विकसित बनाते हैं
चलो देश बनाते हैं !!
छोड़ दो यह बातें , यह सियासत !
यह विकृत लोगों की मनकहीं बातें !!
आज दिल की सुनते हैं, दिमाग से सोचते हैं !
अपने काले धन को नहीं ,
अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य को देखते हैं !
चलो देश बनाते हैं !!
कभी सोचो , जब यह काल धन ना होगा !
तो कहाँ से हथियार आएंगे !
और वोह अपने भाइयों को आतंकवादी बनाएंगे !!
चलो अब अपनी करते हैं ,
चलो देश बनाते हैं !!