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शनिवार, 19 नवंबर 2016

चलो आज देश बनाते हैं


चलो आज देश बनाते हैं ,


चलो आज देश बनाते हैं ,
  कुछ अपनी ,  कुछ तुम्हारी सबको बताते हैं !!

धुप निकली है,  
     फिर से आज़ादी के बाद !
उसको समेट कर ,
चलो सबको बुलाते हैं !
    चलो आज देश बनाते हैं !!

धुप में भी सियासत जारी है ,
    कभी उनकी , तो कभी हमारी बारी है !
चलो सियासत को भूलते हैं ,
   चलो देश बनाते हैं !!

"' धुप बोली -->" 

अबकी निकली हूँ,  तो यूं नहीं जाऊंगी !!
    शाम तक कुछ को गर्मी ,
तो कुछ को अपने साथ लेकर जाऊंगी !! [ Saying to corrupt people]

जो लगे गर्मी , 
   तो  घबराना  न तुम  !
जो गए घबरा ,
 तो क्या दोगे साथ तुम ,
मुझे क्या काले बदल में  छिपा दोगे तुम !!


युवा हो तुम,
 अब भी सोच लो !
कला सफ़ेद करते रहो मेरे दोस्त ,
या ज़िन्दगी जीना सीख लो !!

ज़िन्दगी का क्या,
  आधी निकल गयी, बाकि निकल जाएगी !
अगर यूं ही जीते रहे ,
 तो तुम्हारी नहीं, 
    तुम्हारे वंशजों  की क्या जीने की बारी आएगी !!

माना सब चोर हैं ,
       कोई थोड़ा , तो कोई बड़ा चोर है !
कहीं से तो शुरुवात होगी ,
        तो चलो छोटा  ही सही ,
            लेकिन ईमानदारी का फूल खिलते हैं !
चलो देश बनाते हैं !!

राह कठिन , और यह  धुप कुछ आज बुलंद है !
   ऊपर तक जाते हैं ,
अपने देश को सबसे विकसित बनाते हैं 
चलो देश बनाते हैं !!

छोड़ दो यह बातें , यह सियासत !
      यह विकृत लोगों की मनकहीं बातें !!

 आज दिल की सुनते हैं, दिमाग से सोचते हैं !
अपने काले धन को नहीं , 
      अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य को देखते हैं  !
 चलो देश बनाते हैं !!

कभी सोचो , जब यह काल धन ना होगा !
       तो कहाँ से हथियार आएंगे !
 और वोह अपने भाइयों  को आतंकवादी बनाएंगे !!

  चलो अब अपनी करते हैं , 
        चलो देश बनाते हैं !!