कुछ पंगतियाँ देश की वर्तमान स्थिति पर !!
आज़ादी के इतने वर्ष भी, इंतज़ार करती आँखें !
सूखी, भीगी, सुलगती आँखें !!
इन आँखों ने, हमेशा से लड़ता हुआ देखा है !
इस विविधता को बिखरता हुआ देखा है !!
जो आँखों में अँगारें हों, तो वतन की सीमा पर जाकर उगलो !
अपनो को जलाकर, क्या मिलेगा तुम्हें !!
जो रक़्त है भारत माँ का, तो यह लड़ाई क्यूँ !
धर्म के नाम पर यह आतंकवाद क्यों !!
"साहित्यकारों को सम्मान वापस करते कुछ शब्द लिख रहा हूँ "
जो आपको मिले सम्मान, तो करो सम्मान इनका !
विषुब्ध हो, तो छलनी कर दो अपनी कलम से !!
जो कलम में है सच, तो देश होगा तुम्हारा !
सियासत में, कलम टोड़ा नही करते !
बेवकूफों के साथ जुड़ा नही करते !!
@आशीष चड्ढा - Chads
आज़ादी के इतने वर्ष भी, इंतज़ार करती आँखें !
सूखी, भीगी, सुलगती आँखें !!
इन आँखों ने, हमेशा से लड़ता हुआ देखा है !
इस विविधता को बिखरता हुआ देखा है !!
जो आँखों में अँगारें हों, तो वतन की सीमा पर जाकर उगलो !
अपनो को जलाकर, क्या मिलेगा तुम्हें !!
जो रक़्त है भारत माँ का, तो यह लड़ाई क्यूँ !
धर्म के नाम पर यह आतंकवाद क्यों !!
"साहित्यकारों को सम्मान वापस करते कुछ शब्द लिख रहा हूँ "
जो आपको मिले सम्मान, तो करो सम्मान इनका !
विषुब्ध हो, तो छलनी कर दो अपनी कलम से !!
जो कलम में है सच, तो देश होगा तुम्हारा !
सियासत में, कलम टोड़ा नही करते !
बेवकूफों के साथ जुड़ा नही करते !!
@आशीष चड्ढा - Chads