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शनिवार, 4 मार्च 2017

इस युग का मार्ग प्रदर्शक बन

सपुत्र मैं इस भूमि का,  
    संदेश यह लेकर आया हूँ
तू निर्भय है,      
    तू शोभित बन
तू इस युग का मार्ग प्रदर्शक बन !

हिमालय खड़ा है,
       बटने को
    कश्मीर वो हमसे माँग रहे,
क्या लगता है तुमको है वो
       प्यार से यूँ ही मान रहे !

वीरों ने दिया बलिदान जो है,   
   पुत्रों के शीश चढ़ाए हैं ,
बहनो ने अपने सुहागों से,    
   धरती का मान बचाया है !

वोह ताज की ज्वाला क्यों भूलूँ ,   
      वोह मुंबई को जलता क्यों देखूँ,
वोह आँख लगाए बेठा है
      मैं  उस आँख को यूँ केसे देखूँ ! 
मैं  पूरब हूँ ,   
    वोह पश्चिम है ,
मैं  उत्तर हूँ,   
    वोह दक्षिण हैं  
मैं  प्यार का हाथ बड़ता हूँ,    
   वोह पीठ पर वार चलता है
वोह कारगिल में बेठा था,    
   धोखा और द्वेष लिए,
मैं  केसे चुप रहा जाता था ,    
   वोह मुझको ही ललकार रहा !

मिलना गंगा का जमुना में,     
   भाता सबको है , 
     ह्रदेय से
कर देता खंडित - खंडित है,   
   जो थोड़ा सा खोट मिला ,
      उस पावन  गंगा जल मे है !

माना , सिन्ध बिना ना होता,     
    मे्रे  हिद का सपना हे,  
बाँह फ़ेलकर साथ मैं  दूँ ,      
    जो बनता वोह अपना है,
यह दूरियां ख़तम हो सकतीं , 
    आतंकवाद मिटाना ही,     
      अगर दोनो का सपना है  !!  #shabdras