अमेरिका में रेल की सवारी
सोचा था फिर से, रेल गाड़ी पकड़ेंगे !
रेलगाड़ी ने ,
पुरानी यादें ताज़ा कर दीं !
रेलगाड़ी ने ,
पुरानी यादें ताज़ा कर दीं !
हर स्टेशन को वीराना सा पाया ,
ना कोई शोर ,
और ना कोई चाय-चाय बुलाता आया !
काश हम उतरते,
कहीं पकोड़े,
कहीं पकोड़े,
और कहीं चाय का खुलड़ उठाते ,
कहीं से बच्चों को चंपक और चंदामामा दिलाते !
कहीं से बच्चों को चंपक और चंदामामा दिलाते !
ना कुछ बेचने वाले दिखते हे,
ना कोई सवारी ,
कुली का शोर दिखा नहीं ,
दिखे तो बस चंद सवारियाँ ,
अपनी अपनी दिशाओं को जाती,
मुस्कुराती,
लेकिन अपनी रेलगाड़ी की याद दिलाती !! #शब्दरस chads