उड़ोगे दूर कितना तुम,
धरती ही साया है !
भागोगे कब तक यूं ही तुम,
हर कदम ही मंज़िल है !!
सोचो एक पल को तो,
तुमने क्या खोया,
और क्या पाया है !
कहाँ से आये थे तुम भी,
तुमने क्या देखा और जाना है !!
कहता था सिकंदर भी,
वोह कहता जो ,
सम्राट अशोक भी था,
जीतूंगा दुनिया को ,
मुट्ठी में करना था !
पड़े शमशान में वोह हैं,
यही जीवन की माया है !
थोड़ा रुक के इक पल भी,
सबको तलब करलो !
जो साथ में हैं सब,
उनका नमन कर लो ! #शब्दरस #Chads
धरती ही साया है !
भागोगे कब तक यूं ही तुम,
हर कदम ही मंज़िल है !!
सोचो एक पल को तो,
तुमने क्या खोया,
और क्या पाया है !
कहाँ से आये थे तुम भी,
तुमने क्या देखा और जाना है !!
कहता था सिकंदर भी,
वोह कहता जो ,
सम्राट अशोक भी था,
जीतूंगा दुनिया को ,
मुट्ठी में करना था !
पड़े शमशान में वोह हैं,
यही जीवन की माया है !
थोड़ा रुक के इक पल भी,
सबको तलब करलो !
जो साथ में हैं सब,
उनका नमन कर लो ! #शब्दरस #Chads