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शुक्रवार, 16 जून 2017

उड़ोगे दूर कितना तुम

उड़ोगे दूर कितना तुम,
     धरती ही साया  है !
भागोगे कब तक यूं ही तुम,
    हर कदम ही मंज़िल है !!

सोचो एक पल को तो,
  तुमने क्या खोया,
     और क्या  पाया है !

कहाँ से आये थे तुम भी,
   तुमने क्या देखा और जाना है !!

कहता था सिकंदर भी,
   वोह कहता जो ,
सम्राट अशोक भी था,
जीतूंगा दुनिया को ,
   मुट्ठी में करना था !

पड़े  शमशान में वोह हैं,
    यही जीवन की माया है !

थोड़ा रुक के इक पल भी,
    सबको तलब  करलो !
जो साथ में हैं  सब,
  उनका नमन कर लो !   #शब्दरस #Chads