में तो क़ुदरत कि फ़ितरत से,
ही खफा हूँ ,
ढूंढ़ता फिरता हूँ,
में अपनी यादों को,
पकड़ता फिरता हूँ ,
बीते लमहों को ,
वक़्त की चादर को,
छूने को बेताब हूँ
साँसों का थमना
थमके फिर रुकना ,
में तो ज़िंदगी के,
दस्तूर से ख़फ़ा हूँ !
रुकना ना फ़ितरत थी कभी ,
अब रुक के चलने कहाँ तय्यार हूँ ! !! #Shabdras
ही खफा हूँ ,
ढूंढ़ता फिरता हूँ,
में अपनी यादों को,
पकड़ता फिरता हूँ ,
बीते लमहों को ,
वक़्त की चादर को,
छूने को बेताब हूँ
साँसों का थमना
थमके फिर रुकना ,
में तो ज़िंदगी के,
दस्तूर से ख़फ़ा हूँ !
रुकना ना फ़ितरत थी कभी ,
अब रुक के चलने कहाँ तय्यार हूँ ! !! #Shabdras