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शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

ख़फ़ा हूँ  !!

में तो क़ुदरत कि फ़ितरत से,

         ही खफा हूँ ,

ढूंढ़ता फिरता हूँ,
   
      में अपनी यादों को,

 पकड़ता फिरता हूँ ,

         बीते लमहों को ,

 वक़्त की चादर को,

         छूने को  बेताब हूँ

साँसों का थमना

        थमके फिर रुकना ,

में तो ज़िंदगी के,

       दस्तूर से ख़फ़ा हूँ !

रुकना ना फ़ितरत थी कभी ,

       अब रुक के चलने कहाँ तय्यार हूँ !    !! #Shabdras