आज बरसों बाद,
यादों की पोटली खोली है,
यादों की पोटली खोली है,
कुछ खट्टी, कुछ मीठी ,
और कुछ नमकीन,
यादें दबी हुयी थीं !
यादों को निकल कर,
जब सजाया,
आपको हर जगह ,
बिखरा सा पाया !
जितना समेटना ,
हमने छाया ,
उतना दर्द हमने ही पाया !! Chads - आशीष चड्ढा
और कुछ नमकीन,
यादें दबी हुयी थीं !
यादों को निकल कर,
जब सजाया,
आपको हर जगह ,
बिखरा सा पाया !
जितना समेटना ,
हमने छाया ,
उतना दर्द हमने ही पाया !! Chads - आशीष चड्ढा