Like us ON FB

सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

आज बरसों बाद

 आज बरसों बाद,
     यादों की पोटली खोली है,
  कुछ खट्टी, कुछ मीठी ,
      और कुछ नमकीन,
 यादें दबी हुयी थीं !

यादों को निकल कर,
     जब सजाया,
आपको हर जगह ,
    बिखरा सा पाया !

जितना समेटना ,
   हमने छाया ,
उतना दर्द हमने ही पाया !! Chads  - आशीष चड्ढा