वक़्त का दरिया ,
बहता जा रहा था ,
यादों को किनारे पर ,
समेटता जा रहा था !
बिखेर किनारों को ,
ढूंडू कहाँ से ,
में तो दरिया के संग,
बहता जा रहा था !
होती जो मर्ज़ी ,
थाम लेता में दरिया ,
छूटे किनारे को ,
मिल कर बताता !
खाड़ी में जाकर ,
सबको है गिरना ,
छूटे किनारों को ,
देखना चाहता था !
वक़्त का दरिया !! आशीष चड्ढा - Chads
वक़्त का दरिया !! आशीष चड्ढा - Chads