कितना विचित्र,
वोह ज़माना था !
छात्र खुद ही,
शिक्षा का दीवाना था !!
गुरुकुल को जाना था,
यही हर बच्चे का सपना था !!
नालंदा हो,
या तक्षशिला !
छात्रों और शिक्षषों से था,
वोह हरा भरा !!
वेदों का पाते थे,
ज्ञान वोह,
आर्युवेद का था,
उनको सम्मान जो !
शिक्षा पाना कितना था सुहाना !! आशीष चड्ढा - Chads
वोह ज़माना था !
छात्र खुद ही,
शिक्षा का दीवाना था !!
गुरुकुल को जाना था,
यही हर बच्चे का सपना था !!
नालंदा हो,
या तक्षशिला !
छात्रों और शिक्षषों से था,
वोह हरा भरा !!
वेदों का पाते थे,
ज्ञान वोह,
आर्युवेद का था,
उनको सम्मान जो !
शिक्षा पाना कितना था सुहाना !! आशीष चड्ढा - Chads