श्रद्यांजलि: संदीप चड्ढा
ज़िन्दगी हमें हर मोड़ पर सिखाती है, शायद !
वक्त की चादर उड़ जाती है, शायद !
सुर्ख़ियों में रहूं ,
या हवा में उड़ जाऊं, शायद !
दिल के झरोकों में रह रह कर याद दिलाता हूँ, शायद !!
मिट्टी था,
मिट्टी हूँ शायद !
भूलता नहीं ,
यादों में रहता हूँ , शायद !
दोस्तों की कमीं न थी, शायद !
अकेला ही चल पड़ा हूँ, शायद !
यादों में रहता हूँ , शायद ! #श
- @आशीष चड्ढा - Chads
ज़िन्दगी हमें हर मोड़ पर सिखाती है, शायद !
वक्त की चादर उड़ जाती है, शायद !
सुर्ख़ियों में रहूं ,
या हवा में उड़ जाऊं, शायद !
दिल के झरोकों में रह रह कर याद दिलाता हूँ, शायद !!
मिट्टी था,
मिट्टी हूँ शायद !
भूलता नहीं ,
यादों में रहता हूँ , शायद !
दोस्तों की कमीं न थी, शायद !
अकेला ही चल पड़ा हूँ, शायद !
यादों में रहता हूँ , शायद ! #श
- @आशीष चड्ढा - Chads