सब जान, नर-पशु, मेरे लिए तो सब समान
न कोई छोटा, न कोई बड़ा,
सबका मेरा एक ही मान।
आकार-विकार भले हों अलग,
रंग-रूप भी हों अनेक प्रकार,
इन्हीं भेदों से रचा है मैंने यह सुंदर संसार।
मेरे लिए तो सब समान,
न कोई भेद, न कोई भाव,
सब मेरे ही अंश हैं,
सब पर एक समान बरसता मेरा प्यार।
मुझ तक पहुँचना है यदि आसान,
तो त्याग दो मन का भ्रमित जहान।
श्रद्धा, प्रेम और समर्पण से आओ,
मेरी शरण में संपूर्ण हृदय से समा जाओ।
मैं वहीं हूँ जहाँ विश्वास है,
जहाँ प्रेम का अटल प्रकाश है।
जो खोजेगा सच्चे मन से मुझे,
वही पाएगा मेरा आशीष और हृदय में निवास है।