कागज़ के पन्नों को,
तेरी ज़ुल्फों की याद में पलटता जा रहा हूँ ऐसे !
जैसे तू यहीं कहीं छुप गई हो जैसे !!
वीरान गलियों में,
तुझे ढूंढता फिर रहा हूँ कुछ ऐसे !
जैसे की हर मोड़ पर,
तेरे कदमों के निशां तलाश रहा हूँ।
कुछ जाम निगलता हूँ,
चलते-चलते, सब छलकते छलकते !
पर हर घूंट में,
तेरी ही झलक पाता जा रहा हूँ जैसे!!
संभलते-संभलते,
बिखरता जा रहा हूँ !
चुपचाप भी तो ,
कितना शोर करता जा रहा हूँ !!
तेरी खामोशी,
अब साज़ बनकर बजने लगी है !
और मेरी तन्हाई,
हर गली से गुजरने लगी है !!
सफ़र ये कैसा है,
जो ख़त्म ही नहीं होता !
तेरी यादों का ये अक्स,
मिटता ही नहीं !!
कागज़ के पन्नों को,
तेरी ज़ुल्फों की याद में पलटता जा रहा हूँ ऐसे #shabras #chads