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शनिवार, 21 दिसंबर 2024

तेरी ज़ुल्फों की याद में

कागज़ के पन्नों को,

     तेरी ज़ुल्फों की याद में पलटता जा रहा हूँ ऐसे !

जैसे तू यहीं कहीं छुप गई हो जैसे !!

वीरान गलियों में, 

     तुझे ढूंढता फिर रहा हूँ कुछ ऐसे !

जैसे की हर मोड़ पर, 

   तेरे कदमों के निशां तलाश रहा हूँ।

कुछ जाम निगलता हूँ,

   चलते-चलते,  सब छलकते छलकते !

पर हर घूंट में, 

   तेरी ही झलक पाता जा रहा हूँ जैसे!!

संभलते-संभलते,

    बिखरता जा रहा हूँ !

चुपचाप भी तो , 

     कितना शोर करता जा रहा हूँ !!

तेरी खामोशी, 

   अब साज़ बनकर बजने लगी है !

और मेरी तन्हाई,

  हर गली से गुजरने लगी है !!

सफ़र ये कैसा है, 

    जो ख़त्म ही नहीं होता !

तेरी यादों का ये अक्स,

         मिटता ही नहीं !!

कागज़ के पन्नों को,

     तेरी ज़ुल्फों की याद में पलटता जा रहा हूँ ऐसे  #shabras #chads