तेरे आने का इंतज़ार करते-करते,
आँखों के आँसू भी सूख गए हैं।
ख़्वाबों में सजा तेरा चेहरा,
वक़्त की धूल में धुंधला सा गया है।
भूल गया हूँ शायद आवाज़ तेरी,
तेरा चेहरा भी यादों में ढलता जा रहा है।
रुक-रुक कर ही ठहर जाता हूँ,
घबरा जाता हूँ सोच-सोच के।
ये तू नहीं, तेरी याद ही है,
जो हर पल मेरी साँसों में बसी है।
हर चाँद और सूरज के उदय के साथ,
तुझे याद करता हूँ हर बार।
काश, तू बस एक बार लौट आए,
तेरे ही इंतज़ार में कटी हैं ये रातें हज़ार।
तेरी राहों में नजरें बिछाए बैठा हूँ,
हर आहट पर दिल मचल जाता है।
पर इस खामोशी में तेरी कमी,
हर लम्हा मुझे तड़पाती जाती है।
क्या तू भी मुझे भूल गई है?
या वक़्त ने तुझे भी बदल दिया है?
फिर भी, तुझसे मिलने की आस लिए,
हर दुआ में तेरा नाम लिया है।