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गुरुवार, 2 फ़रवरी 2017

आपका इंतज़ार दिन रात किया करते थे

आपका इंतज़ार,
       दिन रात किया करते थे  !
दिले धड़कन,
        तेज़ किया करते थे !!

आपके आने से ,
        जो महक जाता था गुले गुलशन !
हम अपनी सांसों ,
        को उसमे महक कर जिया करते थे !!

आपका आना,
     आपकी फितरत थी !
 हम उसको भी,
 आपका इशारा समझ कर जिया करते थे !!

होंठों से निकलते शब्द,
      कुछ शहद की तरह !
 हाँ तो उसको भी,
      हम मदिरा समझ के झूम लेते थे !!

कभी सोचा न था,
   मुलाकात होगी !
हम तो आपको सपनों में भी,
 आंहें  भर के जिया करते थे

मिलना बिछुड़ना ,
      बिछुड़के फिर मिलना !
 हम तो इसमें भी ज़िन्दगी तलाश करते थे !!

आपका मिलना,
       हमारी खुशनबी थी !
वरना हम तो आपकी यादों में मरके जिए करते थे !!

आपका इंतज़ार दिन रात किया करते थे !! - आशीष चड्ढा - Chads